Inspirational Sad Story - Those last days
  


जो चीज जैसी होती है वैसी दिखती नहीं है और ये बात हमने सुना भी है और देख भी है । होठो पे एक मुस्कुराहट कभी दिल का दर्द बाया नहीं पाती ।और आज की भाग दौड़ में हम कुछ गुम हो गए है कि हमे किसी और के दर्द से फर्क भी कहा पड़ता है।


लेकिन सब के होते हुए अपने आप को ढूंढे सायद उसी को      ***अकेलापन*** कहते हैं।  एक खोखली ज़िन्दगी के पीछे हम भागते रहते है ।


सुहानी जों एक साधारण से परिवार का हिस्सा है ।पढ़ने में खूब मन्न लगाती  है उसको आईपीएस अधिकारी जो 👩‍⚖️  बनाना है ।

सब कुछ अच्छा चल रहा होता है कि तभी उसकी मुलाकात एक  उसके साथ पढ़ने वाले सहपाठी * *सुनील** से होती है । 

दोनों एक दूसरे से बिल्कुल हीं अलग  पर वो जो ऊपर बैठा है उसके सामने किसी की  कहा चलती । दोनों में बातचीत होनी सुरु हुई और जल्द हीं दोनों अच्छे दोस्त बन गए।।

दोस्ती प्यार में कब बदल गया दोनों को ना पता चला । जीने मारने के कसमें खाए ,दोनों के दा उम्र साथ निभाने के वादे किए । 


पर आज का प्यार भी तो डिजिटल ही गया है।।


जल्द ही ग्रहण लग गया उनके प्यार को, प्यार का रिश्ता तो रहा नहीं पर अब...अब  सुहानी का क्या ।। वो तो चला गया और इधर बेचारी सुहानी का रो रो कर बुरा हाल था🤧🤮😭

 दिन भर ना किसी से बात करना और ना किसी  काम में दिलचस्पी लेना ,,बस... एक यही रह गया था सुहानी की ज़िन्दगी में..।।  


उसकी दुनिया जैसे चारदीवारी में कैद हो गई थी।।जो लड़की आईपीएस अधिकारी के सपने सजा रही थी वो आज सिर्फ अपने अतीत में उलझ कर रह गई  थी।।

इस बीच वो पूरी अकेली हो गई थी। ना कोई दोस्त था उसके पास जिसके कंधे पे सिर रख कर सुहानी रो सके..और ना कोई परिवार का सदस्य जिससे वो अपनी दिल की बात कह पाए।।


सुनील की याद उसे  अंदर  से खोखला कर थी । घर में सभी सदस्य के होते हुए वो बिल्कुल अकेली महसूस कर रही थी।।

कहते है जब आगे कि जिन्दगी हमे दिखना बंद हो जाए तो अक्सर लोग सहम जाते है। उन्हें ये समझ ही नहीं आता की जो होता है अच्छे के लिए होता है ।।और अक्सर लोग इस चक्कर में मौत को गले लगा लेते है।।


सुहानी सायद थक गई थी इन दर्द को झेल कर..की उसने ये फैसला लिया ... वो दिन जो सुहानी के ज़िन्दगी के आखरी दिन थे ,जहां वो अपनी आखरी सासे ले रही थी ।।

और जहां से वो  फिर कभी ना लौटी... 


🙂👉मोरल इस कहानी के :-

अकेलापन वो बिमारी है जो अच्छे अछो को खा जाती है ।। और ऐसा भी नहीं है कि इसका कोई इलाज नहीं है बशर्ते आप वक़्त पे इसे समझो और इसका डट के सामना करो । और सबसे ज़रूरी अपने परिवार को ज़रूर बताओ की आप किस दौर से गुजर  रहे हो..। 

*†*कठिनाइयों*** को ये जान लेने दो की आप उनसे जायदा कठिन हो....।। और जो सुहानी ने वो गलती आप ना करो..

ENGLISH TRANSLATE :-



The thing does not look the way it is and we have heard it and seen it.  A smile on the lips never leaves heartache. And in today's part race, we have lost something that we have to say the difference from someone else's pain.


 But in spite of everything, Sayid, who has found himself, is called *** loneliness ***.  We keep running after a hollow life.


 Suhani is a part of an ordinary family. It takes a lot of mana to study, to make her an IPS officer who is 4.

 Everything is going well when he meets a classmate reading with him * Sunil **.

 Both are completely different from each other, but someone who was sitting above said to someone.  The two started talking and soon both became good friends.

 Both did not know when friendship turned into love.  They took the vow to kill Jeevan, they both promised to live together.


 But today's love too has gone digital.


 Soon their eclipse was realized, their relationship was no more, but now… what about Suhani.  He left and poor Suhani was in a bad state here

 Throughout the day, neither talking to anyone nor taking interest in any work, it was the only one left in Suhani's life.


 Her world was as imprisoned in the boundary wall. The girl who was decorating the dreams of an IPS officer was only entangled in her past today.

 Meanwhile, she had become completely alone.  There was no friend with whom he could cry Suhani by putting his head on the shoulder..and no family member with whom he could speak his heart.


 Sunil's memory was hollowed out from inside.  Despite all the members in the house, she felt completely alone.

 It is said that when life ceases to be visible to us, people often get scared.  They do not understand that what happens is for the good ... and often people embrace death in this affair.


 Suhani Sayed was exhausted, having to bear the pain .. she took this decision ... the days which were the last days of Suhani's life, where she was taking her last breath.

 And from where she never returned again ...


👉 moral of this story: -

 Loneliness is disease that eats good people.  And it is not as if there is no cure for it, provided you understand it at the time and face it firmly.  And most importantly, tell your family what phase you are going through ..

 * † * Let the difficulties know that you are more difficult than them….  And do not make the mistake that Suhani made ..





 






  By  :- Akanksha Kashyap


 

Inspirational Sad Story - Those last days
  


जो चीज जैसी होती है वैसी दिखती नहीं है और ये बात हमने सुना भी है और देख भी है । होठो पे एक मुस्कुराहट कभी दिल का दर्द बाया नहीं पाती ।और आज की भाग दौड़ में हम कुछ गुम हो गए है कि हमे किसी और के दर्द से फर्क भी कहा पड़ता है।


लेकिन सब के होते हुए अपने आप को ढूंढे सायद उसी को      ***अकेलापन*** कहते हैं।  एक खोखली ज़िन्दगी के पीछे हम भागते रहते है ।


सुहानी जों एक साधारण से परिवार का हिस्सा है ।पढ़ने में खूब मन्न लगाती  है उसको आईपीएस अधिकारी जो 👩‍⚖️  बनाना है ।

सब कुछ अच्छा चल रहा होता है कि तभी उसकी मुलाकात एक  उसके साथ पढ़ने वाले सहपाठी * *सुनील** से होती है । 

दोनों एक दूसरे से बिल्कुल हीं अलग  पर वो जो ऊपर बैठा है उसके सामने किसी की  कहा चलती । दोनों में बातचीत होनी सुरु हुई और जल्द हीं दोनों अच्छे दोस्त बन गए।।

दोस्ती प्यार में कब बदल गया दोनों को ना पता चला । जीने मारने के कसमें खाए ,दोनों के दा उम्र साथ निभाने के वादे किए । 


पर आज का प्यार भी तो डिजिटल ही गया है।।


जल्द ही ग्रहण लग गया उनके प्यार को, प्यार का रिश्ता तो रहा नहीं पर अब...अब  सुहानी का क्या ।। वो तो चला गया और इधर बेचारी सुहानी का रो रो कर बुरा हाल था🤧🤮😭

 दिन भर ना किसी से बात करना और ना किसी  काम में दिलचस्पी लेना ,,बस... एक यही रह गया था सुहानी की ज़िन्दगी में..।।  


उसकी दुनिया जैसे चारदीवारी में कैद हो गई थी।।जो लड़की आईपीएस अधिकारी के सपने सजा रही थी वो आज सिर्फ अपने अतीत में उलझ कर रह गई  थी।।

इस बीच वो पूरी अकेली हो गई थी। ना कोई दोस्त था उसके पास जिसके कंधे पे सिर रख कर सुहानी रो सके..और ना कोई परिवार का सदस्य जिससे वो अपनी दिल की बात कह पाए।।


सुनील की याद उसे  अंदर  से खोखला कर थी । घर में सभी सदस्य के होते हुए वो बिल्कुल अकेली महसूस कर रही थी।।

कहते है जब आगे कि जिन्दगी हमे दिखना बंद हो जाए तो अक्सर लोग सहम जाते है। उन्हें ये समझ ही नहीं आता की जो होता है अच्छे के लिए होता है ।।और अक्सर लोग इस चक्कर में मौत को गले लगा लेते है।।


सुहानी सायद थक गई थी इन दर्द को झेल कर..की उसने ये फैसला लिया ... वो दिन जो सुहानी के ज़िन्दगी के आखरी दिन थे ,जहां वो अपनी आखरी सासे ले रही थी ।।

और जहां से वो  फिर कभी ना लौटी... 


🙂👉मोरल इस कहानी के :-

अकेलापन वो बिमारी है जो अच्छे अछो को खा जाती है ।। और ऐसा भी नहीं है कि इसका कोई इलाज नहीं है बशर्ते आप वक़्त पे इसे समझो और इसका डट के सामना करो । और सबसे ज़रूरी अपने परिवार को ज़रूर बताओ की आप किस दौर से गुजर  रहे हो..। 

*†*कठिनाइयों*** को ये जान लेने दो की आप उनसे जायदा कठिन हो....।। और जो सुहानी ने वो गलती आप ना करो..

ENGLISH TRANSLATE :-



The thing does not look the way it is and we have heard it and seen it.  A smile on the lips never leaves heartache. And in today's part race, we have lost something that we have to say the difference from someone else's pain.


 But in spite of everything, Sayid, who has found himself, is called *** loneliness ***.  We keep running after a hollow life.


 Suhani is a part of an ordinary family. It takes a lot of mana to study, to make her an IPS officer who is 4.

 Everything is going well when he meets a classmate reading with him * Sunil **.

 Both are completely different from each other, but someone who was sitting above said to someone.  The two started talking and soon both became good friends.

 Both did not know when friendship turned into love.  They took the vow to kill Jeevan, they both promised to live together.


 But today's love too has gone digital.


 Soon their eclipse was realized, their relationship was no more, but now… what about Suhani.  He left and poor Suhani was in a bad state here

 Throughout the day, neither talking to anyone nor taking interest in any work, it was the only one left in Suhani's life.


 Her world was as imprisoned in the boundary wall. The girl who was decorating the dreams of an IPS officer was only entangled in her past today.

 Meanwhile, she had become completely alone.  There was no friend with whom he could cry Suhani by putting his head on the shoulder..and no family member with whom he could speak his heart.


 Sunil's memory was hollowed out from inside.  Despite all the members in the house, she felt completely alone.

 It is said that when life ceases to be visible to us, people often get scared.  They do not understand that what happens is for the good ... and often people embrace death in this affair.


 Suhani Sayed was exhausted, having to bear the pain .. she took this decision ... the days which were the last days of Suhani's life, where she was taking her last breath.

 And from where she never returned again ...


👉 moral of this story: -

 Loneliness is disease that eats good people.  And it is not as if there is no cure for it, provided you understand it at the time and face it firmly.  And most importantly, tell your family what phase you are going through ..

 * † * Let the difficulties know that you are more difficult than them….  And do not make the mistake that Suhani made ..





 






  By  :- Akanksha Kashyap


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